शुक्रवार, 8 मार्च 2013

''शालिनी''करवाए रु-ब-रु नर को उसका अक्स दिखाकर .

 

आज करूँ आगाज़ नया ये अपने ज़िक्र को चलो छुपाकर ,
कदर तुम्हारी नारी मन में कितनी है ये तुम्हें बताकर .


 जिम्मेदारी समझे अपनी सहयोगी बन काम करे ,
साथ खड़ी है नारी उसके उससे आगे कदम बढाकर .



 बीच राह में साथ छोड़कर नहीं निभाता है रिश्तों को ,
अपने दम पर खड़ी वो होती ऐसे सारे गम भुलाकर .


 कैद में रखना ,पीड़ित करना ये न केवल तुम जानो ,
जैसे को तैसा दिखलाया है नारी ने हुक्म चलाकर .


 धीर-वीर-गंभीर पुरुष का हर नारी सम्मान करे ,
आदर पाओ इन्हीं गुणों को अपने जीवन में अपनाकर .


 जो बोओगे वो काटोगे इस जीवन का सार यही ,
नारी से भी वही मिलेगा जो तुम दोगे साथ निभाकर .


 जीवन रथ के नर और नारी पहिये हैं दो मान यही ,
''शालिनी''करवाए रु-ब-रु नर को उसका अक्स दिखाकर .
            
           शालिनी कौशिक
  [WOMAN ABOUT MAN]

5 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

very nice

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

सुन्दर ... आभार

Neeraj Kumar ने कहा…

वाह जी वाह! क्या खूब कहा. नर और नारी तो एक गाड़ी के दो पहिये के सामान ही हैं, एक के बगैर दूसरे का काम नहीं चल सकता.
नीरज 'नीर'
KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)

रज़िया "राज़" ने कहा…

आपके इस ब्लोग में मुझे आमंत्रित करने के लिये शुक्रिया।

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

---सही कहा....
धीर-वीर-गंभीर पुरुष का हर नारी सम्मान करे ,
...धीर वीर गंभीर पुरुष ही नारी का सम्मान करे |