शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

पापा ने कितना मना किया था ........

    तनु महाराष्ट्र के मुंबई शहर मे रहती है | जो देश की आर्थिक राजधानी और माया नगरी के नाम से जानीi जाती है |मुंबई मे रहने वाले हर इंसान को वहां की भागती हुई जिन्दगी जीने का आदि होना पड़ता है| अगर वो समय के साथ ना चले तो पूरा दिन बेकार हो जाता है | सुबह जल्दी तैयार होकर ऑफिस के लिये अपने पापा को बिना नाश्ता किये रोज जाते हुए देखती है तनु को बड़ा अजीब लगता है | सुबह उठने के बाद एक पल के किये भी चैन नहीं, कितने ही दिनों तक वो, पापा के साथ बैठ कर नाश्ता भी नहीं कर पाती थी | कई बार तो कितने दिनों तक पापा से बात भी नहीं हो पाती थी | तनु ने ऍम.ए.''समाज शास्त्र'' मे टॉप करने के बाद ''रास्ट्रीय जूनियर फेलोशिप'' परीक्षा पास करी,इसके लिये उसने ''ग्रामीण जीवन, के बारे मे रिसर्च करने को अपना टोपिक चुना | अब इसके लिये तनु, को तीन माह तक गाँव मे जाकर रहना पड़ा था | पर मुंबई की  आधुनिक जीवन शैली मे पली -बड़ी तनु का तीन माह गाँव मे रहने से ही सब कुछ बदल गया | अब उसे गाँव का जीवन अच्छा लगने लगा था | वहां के लोगो की सरलता ,निश्चलता और आराम की जिन्दगी उसे भा गयी थी | उसने तो फैसला भी कर लिया था कि वो शादी करेगी तो किसी गाँव मे ही करेगी |
महेश भाई और सुहास, की इकलौती संतान थी तनु ,जिसे उन्होंने बहुत प्यार से फूलो की तरह पाला है | महेश भाई का तैयार वस्त्रो का आयात -निर्यात का काम था| वे मुंबई के रसूखदार आदमी थे | अपनी बेटी के लिये दुनिया के हर माँ बाप का ये सपना रहता है, कि उनकी बेटी का विवाह किसी ऐसे इंसान, से हो जो जिन्दगी भर उसे सुखी रख सके | महेश भाई और सुहास ने भी ये सपना देखा है, कि तनु की शादी मुंबई मे ही करेंगे तो वो सुखी रहेगी और उनकी आँखों के सामने ही रहेगी|
पर जब भी तनु के लिये मंबई से कोई रिश्ता आता, तनु कोई न कोई बहाने से मना कर देती थी | जब कई बार ऐसा हुआ तो तनु की मम्मी ने उससे इसका कारण जानना चाहा तो तनु ने कहा ''मै मुंबई मे नहीं किसी गाँव मे अपनी शादी करना चाहती हूँ | मै इस भाग -दौड़ की जिन्दगी से तंग आ चुकि हूँ |' उन दोनों ने बेटी को बहुत समझाया कि गाँव का जीवन हम शहर वालो के बस का नहीं है तुम जल्दी ही परेशांन हो जाओगी पर वो अपनी जिद पर अटकी रही |
आखिरकार कलकता के किसी गाँव मे सुरेश के साथ उसकी शादी कर दी गयी | जैसा कि तनु, पहले से ही वाकिफ थी गाँव मे कितनी नीरव शांति रहती है| यहाँ किसी को कोई जल्दी नहीं है | सब कुछ आराम से,आराम से सोना,आराम से उठाना, आराम से खाना और आराम से ही ऑफिस जाना |बस शांति ही शांति तनु को यहाँ आकर बहुत अच्छा लग रहा था, कि अब सब साथ मिलकर सुकून की जिन्दगी जियेंगे सुरेश भी कितने अच्छे है, उनका सुविधाओ से सुसज्जित बहुत बड़ा घर है, और उतनी ही बडी उनकी फैक्ट्री है | बहुत पैसा कमाते थे, साल मे करोडो रूपियो का मुनाफा कमाते थे, क्योंकि भारत के बाहर भी उनकी फैक्ट्री मे बने कपड़ो की बहुत मांग रहती थी |
एक दिन उसने सुरेश से कहा ''मै एक पढ़ी-लिखी लड़की हूँ आपको काम मे अच्छी खासी मदद कर सकती हूँ |,पर सुरेश ने तनु को मना कर दिया कहा कि ''मेरी बीवी काम करे ये ''मै ,कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता तुम घर मे रानी की तरह रहो |'' पर मुंबई की जीवन शैली मे पली -बढ़ी तनु को आराम अब भरी लगने लगा |सास -ससुर इतना प्यार करते थे, उससे कि कोई काम नहीं करने देते थे| करती भी कैसे नौकरो की फौज खड़ी कर दी थी उन्होंने उसके लिये तो कोई क्या काम करे | ये भी एक परेशान करने वाली ही बात थी ना |तनु के लिये | अब  तनु सोच रही है कि क्या उसका गाँव मे शादी करना और गाँव मे रहना का फैसला सही नहीं है? गाँव मे जिन्दगी जीने का निर्णय तो उसका अपना ही था ,पर अब तनु गाँव रुपी पिंजरे मे अपने आप को बंद हुआ महसूस कर रही है | और अपने को खुले आसमान मे उड़ता हुआ देखना चाहती है | और इसी के बारे सोच कर वो उदास रहने लगी और ये उदासी उसकी सास से छुपी ना रह सकी | शायद वो भी इस दौर से गुजर चुकी थी | और तनु के आज मे उसका अतीत उसे साकार रूप मे दिखाई दे रहा हो| तनु की सास शीला ये नहीं चाहती थी कि तनु अकेलेपन की आग मे जले |
शीला ने कहा ''तनु तुम कुछ दिन अपने मायके मुंबई घूम कर आओ|, पर सुरेश ने मना किया उसने कहा 'मुझे तुम्हारे बिना बिना रहना अब बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है तुम कहीं नहीं जाओगी |,सुरेश तनु को बहुत प्यार करते थे पर केवल प्यार से ही तो जीवन नहीं चलता है | समय बिताने के लिये कुछ करना भी पड़ता है अगर इंसान काबिल है तो खाली तो बैठना उसके लिये सजा भुगतने के जैसा होता है मन की शांति बिना कैसे कोई चैन से जी सकता है |तनु ने इतनी पढाई की थी पर यहाँ आकर उसका कोई मतलब नहीं रहा | सुरेश उसे कुछ करने ही नहीं दे रहा था | मुंबई मे तो वो अपने पापा के साथ ऑफिस जाती पापा का काम संभालती थी | पापा ने कितना मना किया था पर तब उनकी बात समझ नहीं आई पर अब लगता है कि वो सही कह रहे थे, पर अब कैसे निकलू इस जेल से | जब कभी सुरेश की इच्छा हुई तो वो कहीं लेकर जाता, उसे अपनी मर्जी से उसे कहीं नहीं जाना था |
अब उसे अपनी गल्ती समझ आ गयी, कि जिस परिवेश मे हम पलते है, रहते है आगे का सारा जीवन उसी तरह ही काटना पड़ता है | अपने माता -पिता से ज्यादा देर तक कोई भी दूर नहीं रह सकता है | अपनों के साथ बिना इंसान 'पर कटे पक्षी' की तरह मेहसूस करता है तनु के पास अब कोई कारण भी नहीं था, कि वो सुरेश से 'तलाक, लेकर आजाद हो जाये इस कैदखाने से |  उसकी तबियत बिगड़ने लगी थी | तनु की सास से उसका ये हाल देखा नहीं जाता था वो उसने फिर कहा सुरेश को ' सुरेश बहु को मायके भेज दो या तुम कहीं उसे घुमाने लेकर जाओ|,तनु को ये बहुत अच्छा लगा कि सास उसका कितना ध्यान रखती है कितना संभालती है | एक बार शीला ने तनु को बताया था कि वो भी कलकता जैसे बड़े शहर से यहाँ आई थी तब उसे ऐसा लगा कि जैसे वो सोने के पिंजरे मे कैद होकर रह गयी है | बहुत मुश्किल से अपने आपको संभाला है
तनु को अभी तक सुरेश ने अपनी फैक्ट्री नहीं दिखाई तो आज तनु ने सोचा कि चलो फक्ट्री देखने जाती हूँ | तनु ने अपनी सास -ससुर को बिना बताये ही जाने के लिये बाहर आकर अपने ड्राइवर से कहा ''मुझे फेक्ट्री ले चलो |' पर ड्राइवर ने मना कर दिया और कहा ''मालिक कहेंगे तो ही ले जाऊंगा |' तनु को आश्चर्य हुआ, क्या मालकिन का कोई महत्व नहीं ? उसने सुरेश को फोन किया ''अपने ड्राइवर से कहो मुझसे बदतमीजी ना करे और फैक्ट्री लेकर आये मुझे फैक्ट्री देखनी है |' पर सुरेश ने इनकार कर दिया कहा कि ''आज नहीं कल मै खुद तुम्हे अपने साथ लेकर जाऊंगा आज मै तुम्हे वक़्त नहीं दे पाउँगा |' वो सुरेश का कहा मान गयी, पर वो कल आज तक नहीं आया | आखिरकार आज फिर तनु ने जाने का याद दिलाया तो सुरेश ने गुस्सा किया,फैक्ट्री मे औरतो का क्या काम है| और हाँ ऐसा क्या है देखने जैसा | मै तुम्हे कहीं घुमाने ले जाऊंगा, जब मुझे टाइम मिलेगा | पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि फैक्ट्री दिखाने मे सुरेश को क्या तखलीफ़ थी | तनु की तो ये आदत ही थी कि वो जो सोचती है| वो कर के रहती है | एक दिन वो टैक्सी लेकर फैक्ट्री पहुँच गयी |
फैक्ट्री के ऑफिस मे सुरेश के साथ एक बहुत ही खुबसूरत औरत बैठी है | उसको देख कर ऐसा लगा जैसे वो इस फैक्ट्री की मैनेजर है | गजब का व्यक्तित्व  था उसका | तनु ने फैक्ट्री मे काम करने वाले एक आदमी से पूछा ये''औरत कौन है|' उसने कहा ''मालिक की पत्नी है |' तनु हैरान रह गयी, अपनी तसल्ली के लिये एक बार फिर पूछा ''कौन है, उसने फिर वो ही कहा ''हमारे मालिक सुरेश जी की पत्नी है |' अब तो तनु टूट ही चुकी थी | तनु का अब मन नहीं कर रहा था फैक्ट्री देखने का और वो वापस घर आ गयी | रात होने का इंतजार करने लगी | आज इंतजार करना बड़ा भारी लग रहा था | रात को जब सुरेश आये तो तनु ने पूछा ''तुम्हारी पहली पत्नी और एक बच्चा भी है, तो उनको कहाँ रखा है आपने ?,मेरे मुह से इस अप्रत्याशित प्रश्न को सुनकर सुरेश डर गये और घबरा गये सोचने लगे कि तनु को कैसे पता चला ये सब के बारे मे,थोडा अपने आप को संभाल कर उन्होंने कहना शरू किया ''तनु विजया और मै एक दुसरे को चाहते थे| शादी करना चाहते थे, पर माँ -बाबूजी इस शादी के लिये कभी हाँ नहीं बोलते क्योंकि हम दोनों का धरम अलग था | तो हमने 'माँ -बाबूजी, को बताये बिना ही कोर्ट मे शादी की थी | अब हमारे दो बच्चे भी है |'
तनु ने कहा तो फिर 'आपने मुझसे शादी क्यों की| ''माँ -बाबूजी के कहने से करनी पड़ी |' और हाँ, ये फैक्ट्री मेरी नहीं विजया की है| ये सब सुनकर तनु ने,अपने जाने की तैयारी की और यहाँ से जाने मे ही अपनी भलाई समझी| उसने सोचा जो अपने माता -पिता को इतना बड़ा धोखा दे सकता है| वो मेरे साथ मौका पड़ने पर कुछ भी कर सकता है तनु वापस मुंबई अपने घर आ गयी |और सब से पहले उसने सुरेश के कारनामे को यहाँ के प्रसिद अख़बार मे छपवाया और एक प्रति अख़बार की विजया को भेज दी | विजया ने सुरेश की असलियत जानने के बाद अपनी फैक्ट्री मे से उसे उसी वक़्त निकाल दिया, और हमेशा के लिये उससे नाता तोड़ लिया | अब तनु को सुरेश के माता -पिता के लिये दुःख हो रहा था| पर सुरेश को उसके किये की सजा तो मिलनी ही चाहिये, जो तनु उसे दी है | तनु सोच रही है, कि आम तौर पर शहर वाले ऐसा काम करने के लिये बदनाम है| पर अब तो गाँव वाले भी किसी से कम नहीं है | और अब तनु खुद को वापस अपनी मुंबई मे समा लेना चाहती है |तनु के पापा महेश भाई और माँ अब तनु के लिये खुश है, कि अब वो अपनी बेटी का फिर से घर बसायेंगे | अब तनु के जीवन से दुःख रूपी अँधेरा छंट चूका है |अब तनु फिर से खुले आकाश मे सांस ले सकती है |
शांति पुरोहित
नाम ;शांति पुरोहित 

जन्म तिथि ; ५/ १/ ६१ 

शिक्षा; एम् .ए हिन्दी 

रूचि -लिखना -पढना

जन्म स्थान; बीकानेर राज.

वर्तमान पता; शांति पुरोहित विजय परकाश पुरोहित 

कर्मचारी कालोनी नोखा मंडीबीकानेर राज .

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7 टिप्‍पणियां:

नीलिमा शर्मा ने कहा…

umda kahani shanti ji aapki kalam se

Shanti Purohit ने कहा…

Bahut shukriya neelimaji

Shanti Purohit ने कहा…

Bahut shukriya neelimaji

Shanti Purohit ने कहा…

Bahut shukriya neelimaji

Shanti Purohit ने कहा…

Bahut shukriya neelimaji

Upasna Siag ने कहा…

bahut badhiya ...paani pijiye chhan kar aur rishta kijiye jaan kar ...

sehba jafri ने कहा…

I m shhhho'k'd!!!!! :(
papa ne thik hi mana kiya tha....
mai to papa ki baat maanungi ab!!!