शनिवार, 8 मार्च 2014

सिर्फ एक ही दिन महिला दिवस क्यों.....

पिछले 4-5 दिनों से कोशिश कर रही हू महिलाओं पर कुछ स्पेशल लिखने की
खैर अब वो तो आप ही लोगों की हौसला अफजाई से पता चलेगा कि मेहनत कितना रंग लायी हैं :-)

आज महिला दिवस हैं खुश हो जाओ भई आज तो अपना दिन हैं 
पर यक़ीनन मेरे गांव की चाचियों, दादियों के लिए इस दिन का कोई महत्व नहीं हैं 
इवन उन्हें तो शायद पता भी नहीं होगा कि यह होता क्या हैं ????
आज मेरे मन में जो पहला सवाल कौंधा वो यह था कि 
सिर्फ एक ही दिन महिला दिवस क्यों ????
या महिला दिवस की ही तरह किसी एक दिन पुरुष दिवस क्यों नहीं ??
जवाब खुद-बेखुद ढूंढा कि वो शायद इसलिय ताकि बाकि के 364 दिन पुरुष दिवस मनाया जा सके !!
और मनाये भी क्यों ना अरे भई! अपना समाज पुरुष प्रधान ही तो हैं 
मनाने का इनका हक़ बनता हैं :(
देखिए मूल भावना को समझें पुरुष मूलत: नारी का बड़ा सम्मान करते हैं 
नारी को देवी मानते हैं, सती पूजा करते हैं और अगर नारियाँ पूजा चाहती हैं तो जलना आवश्यक हैं 
नारियाँ कभी पति की चिता पर जलती थी 
अब इस युग में हमारा सम्मान इस कदर बढ़ गया हैं कि 
स्वयं पति अपने हाथ से भी हमें जला सकता हैं :(
आजकल के लड़कें चाहते तो सीता जैसी पत्नी हैं पर 
राम कोई नहीं बनना चाहता 
उफ्फ पुरुषों का सोचना हैं कि नारियाँ गंगा सी पवित्र रहें और 
पुरुष बगल में गंदे नालें जैसे बहते रहें :-)
पुरुषों को अधिकार हैं कि वो हमेशा हमें हमारी हदें बताते रहे 
हर जगह नारियों के लिए लक्ष्मण रेखायें खिंच दी जाती हैं 
ऑफिस जाओ पर किसी से बेमतलब की बातें मत करना 
कॉलेज में पढ़ाई कर लो लेकिन किसी से दिल मत लगा बैठना 
गुमने जा सकती हो पर कहीं बहक मत जाना 
मूवी देख सकती हो पर सिनेमा हॉल जाना हमें गवारा नहीं etc !!
कैसा देश हैं कैसी दुनिया हैं जहाँ का पुरुष ही हमेशा से कर्ता-धर्ता रहा हैं 
यह पुरुष ही हैं जो एक पति के रूप में होता हैं तो अपनी  पत्नी पर शक करता हैं 
जब एक बाप के रूप में होता हैं तो बेवजह अपनी बेटी को अपने प्यार से दूर कर देता हैं 
यह पुरुष ही हैं जब उसके प्यार को स्वीकार नहीं किया जाता हैं तब तेजाब से लड़की की जिंदगी को ही जला डालता हैं 
पुरुषों की हार्दिक इच्छा हैं कि नारी आगे बढे बस नारी इस बात का 
ख्याल रखे कि वो पुरुषों से आगे बढ़ने की कोशिश ना करे !!
वाह रे मेरे देश यहाँ कभी प्रतिभा पाटिल का गिरना ब्रैकिंग न्यूज़ बन जाता हैं 
तो कभी जूलिया गिलार्ड का पैर से जूता निकल जाना 
यह पुरुष ही हैं जो आज तक महज नारी को सामान और सम्पति की तरह पेश करता आया हैं 
वरना क्या मजाल कि केवल लड़कियों को ही आइटम की तरह पेश किया जाए ??
यह समाज ही हैं जो लड़की के दुप्पटे के महज खिसक जाने से भी उसे निचता का तमगा पहना दिया जाता हैं 
जबकि पुरुष खून करने के बाद भी सफाई देते नजर आते हैं कि मैंने कुछ गलत नहीं किया 
उनके सौ गुनाह माफ, और औरत का एक बार बहक जाना मतलब मृत्युढण्ड :(
कैसा महिला दिवस, कैसे अधिकार और कैसा हक़ ????
नहीं चाहिए हमें एक दिन का मान-सम्मान, बराबर हक़ करने का दिखावा 
इसकी तस्वीर अब बदलनी ही चाहिए !!!!!
"आधी शिक्षा, आधी सेहत ,आधी मजदूरी मिली 
सब हुए आजाद पर हमको न आजादी मिली 
देश में बेटियां अगर मायूस हैं नाशाद हैं 
तो दिल पर हाथ रखकर कहिए क्या हम आजाद हैं ????
क्या हम महिला दिवस भी हमेशा नहीं मना सकते ????"
जितना अनुभव किया उसके अनुसार इतना ही कह सकती हु नारी ही सच्ची शक्ति हैं 
बेशक मेरे घर में भी मेरा भाई हैं पापा हैं पर यक़ीनन पुरुषों को सम्भालने का काम महिला ही करती हैं 
जब पुरुष और महिला दोनों ही एक पहिए के दो पहलू हैं तो महिला को महज बराबर अधिकार देने का कहा जाता हैं पर दिये क्यों नहीं जाते हैं ?????
हम सहनशक्ति जरुर हैं पर जिस दिन सहन करने की हद हो गई उस दिन जरुर यह समाज और इसकी तस्वीर बदलेगी !!!!!!!!
बेशक किन्हीं महाशय जी को मेरी बातें बुरी लग सकती हैं 
पर आप भी थोड़ी सहनशक्ति रखना सिख लीजिए ना आफ्टर आल मैंने कुछ बुरा तो कहा नहीं जो सच हैं बस हैं झुठलाने से तो भला सच बदल नहीं सकता ना ??????
अंत में इतना ही कि -
नारी का परिचय इतना कि यह भारत की तस्वीर हैं 
यह जीजा की परम सहेली पन्ना की प्रतिछाया हैं 
कृष्णा के कूल की मर्यादा लक्ष्मी का शमशीर हैं 
इनका परिचय इतना कि यह भारत की तस्वीर हैं :-)
CHEER TO ALL GIRLS.....
HAPPY INTERNATIONAL WOMAN DAY.....!!!!!

3 टिप्‍पणियां:

shikha kaushik ने कहा…

EXCELLENT POST WRITTEN BY YOU SARIKA JI .EVERY WORD EXPRESSES WOMAN'S INNER FEELING .KEEP IT UP .

Shalini Kaushik ने कहा…

sari sachchai likh dee sarika ji aapne .thanks to share here this post .

sarika bera ने कहा…

lot of thanks both of u......:-)