शुक्रवार, 14 जून 2013

पश्चाताप

   पश्चाताप
                                                                                               

                                                          सुश्री शांति पुरोहित की कहानी    
                                                                                                                                                                                        'सुंदर, थी वो,फूल सी कोमल थी | सुन्दरता के साथ-साथ सरलता भी उतनी ही थी | वाणी इतनी मधुर,बोलती तो  ऐसा लगता,जैसे शीतल जल का झरना बह रहा हो | यहाँ मै अपनी कहानी की नायिका रुनझुन के बारे मे बात कर रही हूँ |
                         गाँव की वो छोरी, रुनझुन,ने सब गाँव वालो के दिल मे अपने लिए जगह बनाली थी | बहुत सुंदर गाँव था 'रामपुर ' अनुपम प्राक्रतिक सौन्दर्य से भरपूर गाँव था | सुबह बहुत ही ठंडी बयार चलती है | खेतो मे सरसों के पीले फूल बड़े ही मन- लुभावन लगते है | मिटटी की सौधी खुशबु का तो कहना ही क्या है | ऐसे मे औरते अपना काम बड़े ही  खुश-मिजाज से करती है,और आदमी गाँव की चौपाल पर आकर बैठ जाते है |
                         फिर होती है,पुरे गाँव वालो के बारे पंचायत शुरू | आज भी लोग आकर बैठ गये और इधर-उधर की बाते शुरू हुई | किसकी बेटी की शादी कहाँ हुई है | कौन क्या कर रहा है आदि | ' जैसे ही बेटियों की शादी की बात चली,तो सूरज ठाकुर की बेटी रुनझुन की बात चली,जो शादी के दो साल बाद ही विधवा हो गयी थी |
                         रुनझुन,सूरज ठाकुर की बेटी,नहीं वो तो सब गाँव वालो की बेटी थी | बचपन के खेल-खेलते -खेलते वो कब बड़ी हो गयी,माँ- बाबा को पता ही नहीं चला | वे तो अब भी उसे अपनी शरारती रुनझुन ही मानते थे | आम के वृक्षों पर चढ़ कर सब दोस्तों को आम तोड़ कर खिलाने मे उसके जैसा कोई फुर्तीला नहीं था | सब के खेतो से वो आम,जामुन और बेर तोड़ लेती थी | कभी पकड़ी जाती तो सामने वाले को अपनी बातो मे उलझा कर नो- दो ग्यारह हो जाती | स्कूल मे सब टीचर से दोस्ती कर ली, जब चाहा वहां से निकल लेती थी | पर फिर भी पढने मे सबसे तेज थी | सब टीचर की चहेती छात्रा थी रुनझुन |
                       ' हायर सेकंडरी' तक ही स्कूल था गाँव मे | रुनझुन ने स्कूल की पढ़ाई, अभी ख़त्म की ही थी,कि घर मे उसके लिए रिश्ते की बात होने लगी थी | बेटी के किशोरावस्था मे प्रवेश करते ही घर वालो को उसको शादी के बंधन, मे बाँधने की जल्दी लग जाती है | सदियों से यही सोच रही है| बेटी पराया धन होती है | उसे उसके ठिकाने पहुंचा दिया जाये,तो ही घर वाले चैन की सांस लेते है | कई बार जल्द बाजी मे किये गये फैसले बेटी के लिए घातक भी हो जाते है खैर छोड़ो |
                      'रुनझुन के लिए एक रिश्ता पास ही के गाँव से आया | रिश्ता लेकर आने वाले बिचोलिये ने,लड़के और उसके खानदान की वो प्रसंशा की,सूरज ठाकुर उसी वक्त  पुरे मन से तैयार हो गये | घर वालो ने बहुत समझाया कि ''सूरज पहले लड़के के बारे मे कुछ जान तो ले, फिर हां करते है |' जब कुछ बुरा होना होता है तो इंसान सिर्फ अपने मन के अतिरिक्त किसी की नहीं सुनता है | खैर छोड़ो
                       ''अगले महीने ही रुनझुन की शादी ठाकुर बलवंत सिंह के साथ हो गयी | ससुराल मे उसका गजब का स्वागत हुआ | सास मान कौर तो ऐसे प्यार करने लगी उसे,जैसे घर मे बहु नहीं बेटी आयी है| रुनझुन को तो वो पलंग से पैर नीचे ही नहीं रखने देती थी | बस बहु और बेटा अपने कमरे मे बैठे बाते करते रहे,उन्हें एक साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त बिताना चाहिए | सास का इतना अपनापन देख कर,रुनझुन मन-ही-मन अपने भाग्य की सराहना खुद करती थी | कुछ समय बाद रुनझुन ने देखा,बलवंत कोई दवा खा रहा है | पास जाकर उसने कहा ''क्या हुआ है आपको,ये दवाई क्यों खा रहे हो ? बलवंत उसे ठीक से जवाब नहीं दे सका | ''बस ऐसे ही थोडा ठीक नहीं लग रहा है |
                         रुनझुन ने कई बार चुपके-चुपके दवाई खाते देखा तो उसे शक हुआ | सास को ये पता चला कि रुनझुन को शक हो गया है| और अब तो बलवंत, को चेक-अप के लिए अस्पताल भी ले कर जाना होगा तो उसने एक दिन रुनझुन से कहा ''तुम कुछ दिनों के लिए अपने माँ-बाबा के घर घूम आओ,बहुत दिनों से गयी नहीं हो |'' अचानक सास से मायके जाने की बात सुन कर तो उसका शक यकीन मे बदलने लगा | वो अपने माँ-बाबा के घर आ गयी | रुनझुन को अचानक आया देख कर माँ-बाबा बहुत खुश हुए | उसका उतरा हुआ चेहरा देख कर चिंतित भी हुए | पूछने पर रुनझुन ने कहा ''कोई चिंता की बात नहीं है | पर मेरे यहाँ आने के बाद  उनकी तबियत बिगड़ गयी है मुझे आज ही वापस जाना होगा |''
                          जब रुनझुन घर पहुंची तो घर मे सास-ससुर और पति कोई नहीं था | नौकर से पूछा ''सब कहाँ गये |' नौकर चुप कुछ नहीं बोला | रुनझुन के बार-बार पूछने पर उसने कहा ''छोटे ठाकुर को लेकर अस्पताल गये है |' सुनकर वो घबराई पर अपने को सम्भाल कर कहा '' क्या हुआ छोटे ठाकुर को,मुझे कुछ बताओगे ?' नौकर घबराया पर बोलना पड़ा '' छोटे ठाकुर की किडनी खराब है | डॉ . ने कहा कभी भी कुछ भी हो सकता है |'' सुनकर रुनझुन धम्म से सोफे पर बैठ गयी | उसको अपने चारो और अँधेरा दिखाई देने लगा |
                        उसी वक्त उसी नौकर के साथ रुनझुन अस्पताल पहुँच गयी | उसे मायके से इतनी जल्दी वापस आया देख कर वो तीनो सकते मे आ गये | रुनझुन तो पति से लिपट कर रोने लगी | सास-ससुर उसे सँभालने मे लग गये | उसने सास को कुछ नहीं कहा रुनझुन गुस्से मे वापस अकेली ही घर चली गयी | अपने आप को कमरे बंद कर लिया और रोने लगी | रुनझुन के सास -ससुर उसके पीछे- पीछे घर आये,देखा रुनझुन अपने कमरे मे बंद है | उन दोनों ने कमरे का दरवाजा खुलवाने की बहुत कोशिश की,पर उसने नहीं खोला | अंत मे सास- ससुर उससे माफ़ी मांगने लगे की हम है, तुम्हारे दुःख का कारण ,पर उसने फिर भी कुछ नहीं कहा | तभी रुनझुन कमरे से बाहर आयी, उसकी आँखे सूजी हुई थी |उसने कहा ''आप माफ़ी मत मांगो मेरी किस्मत मे जो लिखा वो हुआ, आप चिंता मत करो अब उनके साथ हम सब मिलकर ख़ुशीयो के साथ जियेंगे | उनको आभास नहीं होने देना है कि हम दुखी है | सास ने बहु को प्यार से गले से लगाया,दोनों रोने लगी |कुछ  दिनों बाद अस्पताल से छुटी मिली | रुनझुन अब अपने पति की सेवा मे तन-मन से लग गयी | समय भागने लगा | शादी के दो साल बाद ही बलवंत किडनी फ़ैल हो जाने के कारण इस दुनिया से विदा हो गया | रुनझुन ने अपने भाग्य के अतिरिक्त किसी को भी दोषी नहीं ठहराया | सास-ससुर ने बहु रुनझुन को बेटी से भी बढ़ कर प्यार दिया | दिन,महिना,साल बिता सास ने रुनझुन को दूसरी शादी के लिए बहुत मुश्किल से तैयार किया | एक बहुत ही अच्छे घर मे उसकी शादी करवाई | लड़का सरकारी महकमे मे उच्च पोस्ट पर कार्य करता है | मान कौर के दिल से अब बहुत बड़ा भार हल्का हुआ है | सही मायनों मे उसने अपना पश्चाताप पूरा किया है |
            शांति पुरोहित
नाम ;शांति पुरोहित 

जन्म तिथि ; ५/ १/ ६१ 

शिक्षा; एम् .ए हिन्दी 

रूचि -लिखना -पढना

जन्म स्थान; बीकानेर राज.

वर्तमान पता; शांति पुरोहित विजय परकाश पुरोहित 

कर्मचारी कालोनी नोखा मंडीबीकानेर राज .

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10 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

.आपकी कहानी मन को छू गयी आभार . सब पाखंड घोर पाखंड मात्र पाखंड
आप भी जानें संपत्ति का अधिकार -४.नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN क्या क़र्ज़ अदा कर पाओगे?

Shanti Purohit ने कहा…

बहुत शुक्रिया शालिनी मेंम

Dayanand Arya ने कहा…

बहुत ही अच्छा कथ्य ।

Shanti Purohit ने कहा…

Shukriya Dayanand arya ji

manjul ramdeo ने कहा…

Achhi Kahani Dil ko choo gayi

Shanti Purohit ने कहा…

Shukriya manjul ji

अरुणा ने कहा…

अच्छी कहानी शान्ति जी

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी कहानी...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ऐसी सोच वाले बहुत विरले होते हैं - पश्चाताप हो तो ही सही कदम उठते हैं

Shanti Purohit ने कहा…

उत्साह वर्धन के लिए बहुत शुक्रिया रश्मि प्रभा जी