शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

हुकूमत इनकी चलती है गुलामी करती है नारी .

 Haughty : Full length portrait of an arrogant caucasian businessman Stock Photo

हैं ये इकबाल नारी  का ,इन्हीं की इज्ज़त है नारी ,
हुकूमत इनकी चलती है गुलामी करती है नारी .

इल्लत पालते हैं ये ,ईमान इनका न कोई ,
 उल्फत करते फिरते ये ,होती बदनाम है नारी .

गुरूर करते हैं खुद पर ,ज़हीन खुद को ही मानें ,
नाज़ रखें ये नाजायज़ ,निभाती उनको है नारी .

ख्याली पुलाव ही खाएं ,ख्वाबी महल बनवाएं ,
समझदारी दिमागों में अगर भर पाए न नारी .

 खोखली इनकी जिंदगी, भूतिया घर या हवेली ,
अँधेरे जीवन में इनके चांदनी लाये है नारी .

सदा गर्मी दिखाकर ही करें औरत को ये खामोश ,
अक्ल में इनसे ऊपर जो,खटकती है वो हर नारी .


 न बदलें चाल-ढाल अपनी ,लिबास अपने न देखें ,
है तुर्रा उस पर ये देखो ,साँस भी पूछ ले नारी .

खुदी में रब हैं ये बनते ,खुदी बन जाएँ ये भरतार ,
''शालिनी ''ही न अकेली भुगतती इनको हर नारी . 


शब्दार्थ.-इकबाल-सौभाग्य ,ईमान-नीयत ,ज़हीन-तीक्ष्ण बुद्धिवाला ,इल्लत-दुर्व्यसन ,तुर्रा-कोड़ा या चाबुक  ,गर्मी दिखाकर-क्रोध दिखाकर ,नाजायज़-अनुचित ,नाज़-नखरा .

      शालिनी कौशिक
             [कौशल]



5 टिप्‍पणियां:

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

BHARTIY NARI
PLEASE VISIT .

Sriram Roy ने कहा…

बहुत -बहुत सुन्दर प्रस्तुति ....

Manohar Chamoli ने कहा…

बहुत सुन्दर .

Devdutta Prasoon ने कहा…

देवी कात्यायिनी माता की जय !
नारी की वास्तविक दशा कासतीक वर्णन १
नारी, अपरीक्षित सम्बन्ध जोडती क्यों है?
नारी ,नुमाइश की ओधनी ओढते क्यों है??
अच्छे फलों की फ्न्चान वह करती क्यों नहीं?
नारी,कृमि-खाये रसहीन फल निचोड़ती क्यों है ??

शारदा अरोरा ने कहा…

मुझसे तो कुछ कहा ही नहीं जा रहा ...ऐसा सब सोच कर भी दुःख होता है ..