शनिवार, 1 नवंबर 2014

बेटी का भाग्य

 तुम रानी बनकर राज करोगी जब तुम किसी के घर की शोभा बनोगी |
         तुम जिस घर में जाओगी उस घर का बन्टाधार हो जायेगा |
''तुम बहुत भाग्यशाली हो|
एकदम गुलाब के फुल की तरह सुवासित होजब तुम पैदा हुई ना तो तेरे बाप को अपने व्यापर में बहुत बड़ा आर्डर मिला और हम उतरोतर तरक्की करते गये |
      तुम अभागी होउस कांटे की तरह जो शूल बनकर चुभता है तुम्हारे जन्म के दिन ही तुम्हारे बाप का काम-धन्धा सब चौपट हो गया हम रोटी को भी मोहताज हो गये थे 

धन और सम्पनता लडकी के भाग्य से कब और कैसे जुड़ गयाअर्थ को लडकी से जोड़कर इतना जहर क्यों उगला जा रहा है लडकी उदास बैठी सोच रही है

शान्ति पुरोहित 

4 टिप्‍पणियां:

Rs Diwraya ने कहा…

अतिसुन्दर लेखन
आभार
मेरे ब्लॉग पर स्वागत है।

Shanti Purohit ने कहा…

धन्यवाद .. आपका कौनसा ब्लॉग है

Sanjay Singh Jadoun ने कहा…

बहुत सुन्‍दर। बच्चियों भावपूर्ण रचना।

sarika choudhary ने कहा…

ryt said mam.....:-)