बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

मेरी डायरी के कुछ पुराने पन्नें.....

पता हैं औरत हर रोल कर सकती हैं जबकि आदमी कभी भी नहीं
औरत आदमी की जिमेदारियों को उससे भी ज्यादा अच्छे से निभा सकती हैं जबकि
आदमी हुह अच्छा तो छोड़ो बेमुश्किल निभा पाएंगे :-)
हां महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं इससे अच्छी बात और क्या हो सकती हैं ??
पर हमारे लिए तो हर रोज वहीं ढाक के तीन पात वाली ही बात हैं
अगर महिलाऐं आगे बढ़ने लगी तो बस लोगों ने इसके लिए विरोध करना शुरू कर दिया
कि महिलाओं के आगे आने से पुरुष प्रधान समाज की वैल्यू कम हो जायेगी
क्यों.....आखिर क्यों ?????
मुझे एक नारी होने के साथ-२ यह सोचकर ख़ुशी होती हैं कि
चाहे कोई महिला इस देश की राष्ट्रपति भी क्यों ना हो
पर वो हमेशा अपने पति की इज्जत करते हैं ,उनकी कद्र करते हैं 
एक नारी कितने भी उच्च पद पर क्यों न हो
पर हमेशा वो अपने पति के सामने झुकी हुई हैं
फिर भी कुछ लोगों को ना जाने क्यूँ अपने मान-सम्मान की चिंता लगी रहती हैं ??
जबकि वो नारी तो उसका सम्मान बढ़ा रही हैं
हमें अपने दिमाग से इस बात को निकालना ही होगा तथा
इस दुनिया के पुरुष प्रधान तथा नारी समाज से परे केवल
एक अच्छे इंसानो के समाज का उदय करना होगा :-)
अगर आज पुरुषों को केवल नारी के इतना सा आगे बढ़ने से ही इतनी तकलीफ हो रही हैं
तो इन्हें सोचना चाहिए कि नारी तो आज तक इन्हें बर्दाश्त करती आयी हैं !!
क्यों आज की बढ़ती हुयी नारी इन्हें पसंद नहीं आयी ???
इस देश के लोग यह क्यों भूल जाते हैं कि 
अगर लड़कियां रैम्प पर कैटवॉक करके फैशन डिज़ाइनर (मॉडल) बन सकती हैं 
तो वो ही लड़की तलवार के बल पर लड़कर दुश्मनों को मिट्टी में मिलाकर झाँसी की रानी भी बन सकती हैं :-)
लड़की का काम केवल चूल्हा-चौका ही सम्भालना नहीं 
वो एक अच्छी बिज़नेस वुमन भी बन सकती हैं 
हम अगर मिस यूनिवर्स बन सकते हैं तो हम एक बेस्ट डॉटर भी बन सकते हैं 
हम रिश्तों को केवल निभाना ही नहीं सही से इन्हें संजोकर रखना भी जानते हैं 
हम केवल नारी रूप को ही नहीं 
हम बेटी रूप ,बहु रूप और माँ के रूप तक को अच्छे से सुशोभित करना जानते हैं !!!!!!
"लड़की लड़की नहीं चिंगारी हैं 
हम अबला नहीं आज की सबला भारतीय नारी हैं !!"

7 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…


ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Shalini Kaushik ने कहा…

VERY RIGHT VIEW,NICE POST.THANKS

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

तभी तो नारी को'शक्ति'कहा गया है!

alka sarwat ने कहा…

सत्य वचन

हमारे देश में एक मिथक चला आ रहा है कि देवता सोमरस का पान करते हैं और अप्सराओं के साथ राग रंग में स्वर्ग का आनंद उठाते हैं .वह सोम रस क्या है ? सोम का अर्थ है चन्द्रमा और चंद्रदेव को ही जड़ी बूटियों का अधिपति माना गया है .इन जड़ी बूटियों में चन्द्रमा अपनी किरणों से उज्ज्वलता और शान्ति भरते हैं .इसीलिए इन जड़ी बूटियों से जो रसायन तैयार होकर शरीर में नव जीवन और नव शक्ति का संचार करते हैं उन्हें सोमरस कहा जाता है .

ऐसा ही एक सोमरस रसायन मुझे तैयार करने में सफलता मिली है जिसमे मेहनत और तपस्या का महत्वपूर्ण योगदान है .वह है- निर्गुंडी रसायन
और
हल्दी रसायन
ये रसायन शरीर में कोशिका निर्माण( cell reproduction ) की क्षमता में ४ गुनी वृद्धि करते हैं .
ये रसायन प्रजनन क्षमता को ६ गुना तक बढ़ा देते हैं .
ये रसायन शरीर में एड्स प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर देते हैं
ये रसायन झुर्रियों ,झाइयों और गंजेपन को खत्म कर देते हैं
ये रसायन हड्डियों को वज्र की तरह कठोर कर देते हैं.
ये रसायन प्रोस्टेट कैंसर ,लंग्स कैंसर और यूट्रस कैंसर को रोकने में सक्षम है.

अगर कोई इन कैंसर की चपेट में आ गया है तो ये उसके लिए रामबाण औषधि हैं.
अर्थात
नपुंसकता,एड्स ,कैंसर और बुढापा उन्हें छू नहीं सकता जो इन रसायन का प्रयोग करेंगे .
मतलब देवताओं का सोमरस हैं ये रसायन.
9889478084

sarika bera ने कहा…

shalini aabhari m aapki hu.....
sach is bar likhna bahut achcha laga....:-)
aapko b thank u...!!

sarika bera ने कहा…

प्रतिभा mam sahi kaha aapne...:-)
shukriya....!!

sarika bera ने कहा…

lot of thanks alka mam....:-)