शनिवार, 14 सितंबर 2013

हाँ..... तुम स्वतन्त्र हो

हाँ ... तुम स्वतन्त्र हो 
पूरी तरह स्वतन्त्र 
पर देखो 
इस आज़ादी का  मतलब 
कुछ गलत मत लगाना ....
जीने का पूरा हक़ है तुम्हें
पर ज़रूरत से ज्यादा साँसे मत लेना 
हक़ रखती हो बोलने का 
अपने दिल की कहने का 
पर देखो 
जो अच्छा सबको लगे 
केवल वही तुम  कहना 
.....
किसने कहा कि घर की चौहद्दियों में कैद हो तुम 
आधुनिक नारी हो 
कोई हद भला बाँधेगी तुम्हे क्यों कर 
पर कदम घर से बाहर रखने से पहले 
इजाजत मेरी तुम लेना 
हाँ 
बिलकुल स्वतन्त्र हो 
पूरी तरह आज़ाद हो तुम ...



3 टिप्‍पणियां:

shorya Malik ने कहा…

नारी स्वतन्त्र होकर भी स्वतन्त्र नही है,

दिगम्बर नासवा ने कहा…

समाज के दोगलेपन को उजागर करती प्रभावी ओर शशक्त रचना ...

Shalini Rastogi ने कहा…

धन्यवाद shorya Malik और दिगंबर नासावा जी